सैनिटरी नैपकिन्स का विकल्प

अन्वेषक: सुलोचना पन्देकर व्यवसाय: मीडिया और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता स्थान: सिओलिम, गोवा महीने मे एक बार दुनिया की आधी आबादी एक ऐसी समस्या से जूझती है जिसमे उनके शरीर से रक्त का कुछ हिस्सा बह के निकाल जाता है। जिसे हम मासिक पाली, मासिक धर्म, periods या mensuration के नाम से जानते है। मेरा उसे समस्या कहना लाज़िम नहीं है। यह एक प्राकृतिक क्रिया है जो हर औरत के शारीरिक बनावट का अहम हिस्सा है। जब हम इसे समस्या कह देते है तभी से हम इसे ढकने या छिपाने की कोशिश करने लगते है और असली समस्या इस वजह से शुरू होती है। इस कारण हम इस पर खुलकर बात…

View details

वायु, जल और ज़मीन

अन्वेषक: जिल फर्गुसन व्यवसाय: पर्यवारंविद स्थान: मंद्रेम,गोवा मानव जाति के सम्पूर्ण इतिहास के दौरान समन्दर ने हमेशा से ही उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित किया है। समुद्र का जल सदा से ही भोजन, बहुमूल्य खनिजों, व्यापार के लिए एक विशाल राजमार्ग के रूप में, अपशिष्ट के निस्तारण, ऋतु चक्र के संतुलन को बनाए रखने आदि के एक विशाल और बहुमूल्य स्त्रोत के रूप मे मानव जाती की सेवा करता आया है। एक शोध के अनुसार पृथ्वी के वातावरण मे पायी जाने वाली जीवनदायी ऑक्सिजन की 70% आपूर्ति समन्दर द्वारा की जाती है। यही नहीं सम्पूर्ण विश्व के संतुलित आहार के लिए आवश्यक प्रोटीन की 10 प्रतिशत आपूर्ति भी…

View details

उदबिलाव संरक्षण

अन्वेषक: मल्हार इंदुलकर व्यवसाय: उदबिलाव संरक्षणवादी स्थान: चिपलून, महारष्ट्र मैं हमेशा से ही कहता आया हूँ कि एक स्टूडेंट को बारहवीं के बाद कम से कम एक साल का ब्रेक लेना चाहिए। हम बचपन से लेकर हमारी युवावस्था तक भागते ही रहते है। कभी हम खुद से यह सवाल नहीं करते है कि हमे कैसा जीवन जीना है। बस जो सब कर रहे है और सब कह रहे है वो ही हमारे सपने, हमारी इच्छाएं बन जाती है। पर फिर एक वक़्त आता है जब हमे रिग्रेट होता है कि काश मैंने यह किया होता या इस क्षेत्र मे अपना करियर बनाया होता। बरहवीं के बाद का वक़्त वो वक़्त…

View details

सपनो का भारत

अन्वेषक: हसमुख सपनावाला व्यवसाय: शिक्षक स्थान: मंधंगढ़,महाराष्ट्र मैं अपने अगले परिंदे से जब मिला और जब मैंने उनके काम को समझा तब मुझे अपने बचपन और युवावस्था के वो दिन याद आ गए जब मैं सबसे ज्यादा खुश था। यह वो वक़्त था जब मैं मम्मी-पापा के साथ घूमने के लिए मॉल की जगह शहर के बाग-बगीचों मे जाता था । जब मैं दिनभर घर से बाहर दोस्तों के साथ खेलता था। उनके साथ शहर के बाहर पहाड़ों और जंगलो मे घूमने जाता था। जब हम दोस्त नदियों और तलबों मे नहाते थे। पर देखते ही देखते बहुत तेज़ी से वक़्त की हवा बदली और पुस्तकों और परीक्षा के अत्यधिक…

View details

एक स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र के लिए मधुमक्खी पालन

अन्वेषक: अमित घोद्से व्यवसाय: मधुमक्खी पालन स्थान: पुणे, महाराष्ट्र कई बार हम जीवन मे कुछ ऐसी घटनाओं से रूबरू होते है जो हमारे जीवन मे अनिश्चिता का भाव पैदा कर देती है। वैसे भी मानव जीवन सदा से ही अनिश्चिताओं से भरा रहता है। ये घटनाएँ या परिस्थितियाँ कई बार हमारे जीवन की दिशा को बदल देती हैं। ये सारी घटनाएँ हमे कुछ न कुछ सीख दे जाती है, कुछ अनुभव दे जाती है। पर इसके लिए जरूरी है की हम उन घटनाओ को गौर से देखे और उनसे उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों मे आत्मवलोकन करे और उनसे खुले मन से कुछ सीखने की इच्छा रखे। यह तभी हो सकता…

View details

वापसी की ओर

अन्वेषक: दीपिका चोर्डिया व्यवसाय: रहने वाले सुविधाप्रदाता स्थान: वेल्हे,महाराष्ट्र भारत आज आबादी के घनत्व के मामले मे एक बहुत बड़ी समस्या से गुजर रहा है। एक तरफ जहाँ बहुत तेज़ी से गावों की आबादी शहरों की ओर पलायन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ शहरों को इस बढ़ती हुई आबादी के कारण झुग्गियों की गंदगी को मजबूरन झेलना पड़ रहा है। गांवों में बूढ़े और बच्चों के अतिरिक्त कोई युवा बमुश्किल ही दिखाई पड़ता है। ये झुग्गियाँ और इनकी सारी गंदगियाँ भारत के हर शहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी है। इतना महत्वपूर्ण हिस्सा की एक शहर का जीवन इन गंदी बस्तियों के बिना चल ही नहीं सकता है।…

View details

देश कि रगों में नदियाँ

अन्वेषक: राजेश पंडत व्यवसाय: नदी संरक्षण स्थान: नासिक, महाराष्ट्र यह भारत का सौभाग्य है की भारत की भूमि पर फैली हुई नदियाँ उसके लिए बिलकुल वैसा ही काम करती है जैसा की हमारे शरीर मे फैली हुई रक्त वाहनियाँ हमारे शरीर मे रक्त संचार का काम काम करती है। 329 मिलियन हेक्टेयर के विशाल भौगोलिक क्षेत्र मे फैली हुई यह नदियाँ भारत की प्राकृतिक समृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण है। भारत के सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विकास का भार उठाते हुए ये नदियाँ हजारों वर्षों भारत की धरा पर अविरल बह रही है। ये नदियाँ महज एक जल का स्त्रोत ही नहीं है अपितु यह एक पूरा सिस्टम…

View details

किसानो की ओर….

अन्वेषक: मधुकरदास व्यवसाय: जल संरक्षण स्थान: यावतमल, महाराष्ट्र यवतमाल जिला अगर भारत मे मशहूर है तो सिर्फ एक बात के लिए, वो हमारे अन्नदाताओं, किसानों की आत्महत्याओं की वजह से। 2,24,000 हेक्टर का जंगल है इस क्षेत्र में। वर्षा भी सामान्य ही होती है, फिर क्या वजह है जो यहाँ का किसान आत्महत्या कर रहा है। खैर किसान की हालत तो पूरे देश मे लगभग एक जैसी ही है। गरीब वो राजस्थान मे भी है, गरीब वो यहाँ पर भी है। फसल की उचित कीमत उसे पंजाब मे भी नहीं मिलती है, और यहाँ पर भी। लागत उसकी महंगी हरयाणा मे भी हो रही है और यही हाल यहाँ पर…

View details

संरक्षण और परंपरागत ज्ञान बांटने

अन्वेषक: मसुनील देशपांडे व्यवसाय: शिक्षक स्थान: अमरावती , महाराष्ट्र दुनिया के सभी वनवासियों ने प्रकृति के साथ विषम और जटिल परिस्थितियों मे जीना सीख लिया था। ये वनवासी उन इलाकों मे रहते आए है जो जैव विविधता से भरपूर होते हैं। भारत में 68 लाख परिवार 227 वनवासी जातीय समूह से संबंधित है। ये लोग ज्यादातर स्थानीय जंगलों में या उनके करीब रहते हैं और इन्होंने हजारों सालों से इन जंगलों की जैव विविधता को संरक्षित करके रखा हुआ है। इन आदिवासियों को जंगल मे पायी जाने वाली बहुमूल्य वनस्पतियों का अद्भुत ज्ञान है। आदिवासी लोगों का वनों और प्राकृतिक संसाधनों के साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, व्यावहारिक, और परस्परावलंबी संबंध रहा…

View details

किसानो के अधिकारों के लिए कला

अन्वेषक: श्वेता भात्ताद व्यवसाय: कलाकार स्थान: नागपुर,महाराष्ट्र कला/आर्ट एक तरीका है जिसके माध्यम से हम, हमारे अनुभवों को दुनिया के सामने रचनात्मक तरीके से अभिव्यक्त कर सकते है। यह वो तरीका है जिसके माध्यम से एक कलाकार दुनिया को वो दिखाता है जो वो देख नहीं पाती है। जिसके माध्यम से वह कही किसी कोने मे दबी हुई किसी सामूहिक भावना को एक स्वरूप देता है। कला एक जादू है, एक सपना है, परिवर्तन का, एक नयी दुनिया का। हजारों सालों का हमारा इतिहास गवाह है, परिवर्तन के हर दौर मे कला और कलाकारों ने इस दुनिया को एक नया स्वरूप देने मे एक अहम भूमिका निभाई है। एक कलाकार…

View details